प्रोस्टेट की रामबाण दवा- प्रोस्टेट मेडिसिन तुरंत आराम

Prostate Gland (पौरूष ग्रंथि) पुरुषों में पाई जाने वाली ग्रंथि है। प्रोस्टेट ग्लैंड को पुरुष का दूसरा दिल भी कहा जाता है। पुरुष के शरीर प्रोस्टेट ग्रंथि का अहम महत्व है, इस ग्लैण्ड द्वारा पुरुषों के शरीर में पेशाब के बहाव को नियंत्रित करना, वीर्य बनाना आदि कार्य किये जाते हैं। प्रोस्टेट पुरूष के शरीर में अखरोट की तरह दिखने वाली ग्रंथि है। यह ग्लैंड पुरुषों में मूत्राशय के नीचे, रैक्टम (मालशय) के सामने पायी जाती है। इसके द्वारा एक मिल्की फ्लूड तैयार किया जाता है जो सीमन का ही एक अंश होता है। जब स्पर्म फीमेल एग्स की ओर ट्रैवल कर रहे होते हैं तो यह दूधिया पदार्थ ही इन स्पर्म को प्रोटेक्शन देते हैं।

यदि प्रोस्टेट ग्लैण्ड में सूजन / इंफ्लेमेशन की समस्या आ जाती है तो इस स्थिति को प्रोस्टेटाइटिस (Prostatitis) कहा जाता है। इस स्थिति में पेसेंट को काफी दर्द का सामना करना पड़ता है। प्रोस्टेट ग्रंथि Urethra के चारों तरफ उपस्थित होती है। यह ग्रंथि पुरुषों में Reproductive System (प्रजनन तंत्र) का हिस्सा है। पुरूषों में प्रारम्भ में यह ग्रंथि छोटी होती है परन्तु बढती उम्र के साथ साथ यह ग्लैंड मेल्स में आजीवन बढती रहती है। सामान्यतः पुरूषों में प्रोस्टेट ग्लैंड बढने की समस्या 40 वर्ष से 60 वर्ष और उससे ऊपर के उम्र में देखने को मिलती है।

जब पौरुष ग्रंथि हद से अधिक बढ़ जाती है तो Urethra पर प्रेशर पड़ता है, जिससे ब्लैडर से पेशाब के फ्लो को कम कर देता है और पेशाब करने में दिक्कत आती है। प्रोस्टेट के बढ़ने की समस्या को साइंस की भाषा में बी0पी0एच (बीनीग्न प्रोस्टेट हाइपरप्लेसिया) कहा जाता है। प्रोस्टेट बढ़ने पर मूत्राशय, गुर्दे सम्बन्धी तथा यूरिनरी ट्रैक्ट संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।

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BPH (Benign Prostatic Hyperplasia) के लक्षण

  • मूत्र विसर्जन करते समय तकलीफ होना।
  • रात को बार बार मूत्र विसर्जन के लिए उठना।
  • पेशाब करते टाइम जलन का अनुभव होना।
  • पेशाब करने जाने पर पेशाब की धार आने पर में देरी होना।
  • मूत्र विसर्जन के उपरान्त भी मूत्राशय में मूत्र की कुछ मात्रा शेष रह जाना। इस रूके हुये मूत्र में रोगाणु उत्पन्न होने का खतरा रहता है और UTI (यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन) होने का डर रहता है।
  • पेशाब का बहुत तेज प्रेशर बनना परन्तु मूत्र विसर्जन करने जाने पर पेशाब का बूंद बूंद कर आना।
  • अण्डकोष में लगातार दर्द का अनुभव होना।
  • पेशाब पर नियंत्रण नहीं रहना।
  • संभोग के समय वीर्य निकलने पर दर्द का अनुभव होना।

प्रोस्टेट बढने के कारण (Causes of Enlarged Prostate)

मेडीकल साइंस में पुरुषों में बढती उम्र के कारण आने वाली प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (BPH) की दशा को सामान्य माना गया है। आदमी की उम्र 80 वर्ष पार करने के उपरांत सामान्यतः बी0पी0एच0  सिण्ड्रोम की समस्या उत्पन्न होती है। पुरुषों के शरीर में टेस्टोस्टेरॉन (पुरुष हार्मोन) तथा कुछ मात्रा में एस्ट्रोजन (फीमेल हार्मोन) उत्पन्न होता है। दिन प्रतिदिन बढ़ती उम्र के कारण पुरुष रक्त में एक्टिव टेस्टोस्टेरान का मात्रा कम होने लगती है।

इस प्रकार मेल बॉडी में एस्ट्रोजन का प्रोडक्शन बढ जाता है। पौरुष ग्रंथि में एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा बढ़ने के कारण हार्मोनल चेंज आते हैं और प्रोस्टेट ग्लैंड की कोशिका बढने लगती है। हालाकि प्रोस्टेट बढ़ने जैसी समस्या का सही कारक अभी तक ज्ञात नहीं हुआ है। बढती उम्र के साथ मेल हार्मोन का कम उत्पान होना प्रोस्टेट बढ़ने की समस्या का प्रमुख कारण माना जाता है। यद्यपि यह भी सत्य है कि पौरुष ग्रंथि बढ़ने का तथ्यात्मक कारण अभी तक ज्ञात नहीं हो सका है। यदि आपके परिवार में किसी को प्रोस्टेट संबंधी समस्या रही है अथवा वृषण (Testicle या testis) में असामान्यता प्रोस्टेट ग्लैंड बढने का एक कारक भी हो सकता है।

यह भी प्रकाश में आया है जिन व्यक्तियों में बचपन (छोटी उम्र) में वृषभ निकाल दिये जाते हैं उनको प्रोस्टेट सम्बन्धी समस्या नहीं आती हैं। प्रोस्टेट से जुड़ी बीमारियाँ आपके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर भी निर्भर करती हैं। यदि आपको हर्ट डिजीज, खून के बहाव सम्बंधी बीमारी, मोटापा, डाइबिटीज (मधुमेह) आदि बीमारी हैं तो आपको प्रोस्टेट ग्लैंड सम्बन्धी विकार आ सकते हैं।

यदि आपका शारीरिक चहल कदमी, व्यायाम, चलना फिरना कम है तो भी आपको पौरूष ग्रंथि सम्बन्धी रोग परेशान कर सकते हैं। प्रोस्टेट सम्बन्धी रोग से पीडित व्यक्ति से एक अन्य सवाल प्रोस्टेट का साइज कितना होना चाहिए भी है। इस प्रश्न कि प्रोस्टेट का साइज कितना होना चाहिए का इलाज भी आपको इस लेख में अवश्य मिलेगा।

प्रोस्टेट बढ़ने से रोकने के उपाय (Prevention of Benign Prostatic Hyperplasia in Hindi)

जो भी पुरुष प्रोस्टेट बढ़ने के कारण होने वाली दिक्कतों का सामना कर रहा होता है, उसके दिमाग में हर समय ख्याल आता है कि प्रोस्टेट बढ़ने की रोकथाम कैसे की जाती सकती है। हालांकि पौरुष ग्रंथि बढ़ने के कुछ मामलों में यह समस्या उम्र के साथ स्वतः सामान्य होते जाते हैं, पर आप कुछ सावधानी एवं उपायों का प्रयोग कर इस समस्या को नियंत्रत कर सकते हैं।

  • कुछ पुरुष जब किसी परेशानी (दिक्कत) में होते हैं उन्हे बार बार पेशाब व मल त्याग की इच्छा जाग्रत होती है। इस प्रकार तनाव, डिप्रेशन को कम करने के आप प्रतिदिन मेडीटेसन, व्यायाम आदि का प्रयोग कर अपने को इस तनाव से मुक्त कर सकते हैं।
  • यदि आपको मूत्र विसर्जन के बाद भी मूत्राशय में मूत्र रूका हुआ फील हो रहा है तो आप मूत्र विसर्जन करते समय थोडा और समय दें। मूत्र आपकी मूत्रमार्ग से अवश्य निकल जायेगा साथ ही यह भी ध्यान रखें कि मूत्र विसर्जन करते समय आपको जोर नहीं लगाना है।
  • कैफीन, एल्कोहॉल का प्रयोग कम कर दें। शाम के समय पेय पदार्थ के इस्तेमाल को भी कम करना आपके लिए फायदेमंद होगा। कैफीन एवं एल्कोहल किडनी को मूत्र उत्पादित करने के लिए उत्तेजित करते हैं और रात्रि में आपको अधिक बार पेशाब जाना पड़ता है।
  • यदि आप किसी भी प्रकार की मेडिसिन ले रहे हैं तो डाक्टर से सलाह कर आप उनको चेंज करा सकते हैं अथवा मेडीसिन की टाइमिंग को चेंज कर इस समस्या को हल कर सकते हैं।

प्रोस्टेट सम्बन्धी जाँच एवं परीक्षण- (Diagnosis of Enlarged Prostate)

यदि आपको भी ऊपर वर्णित प्रोस्टेट सम्बन्धी लक्षण महसूस हो रहे हैं तो आप अपने नजदीकी विशेषज्ञ डाक्टर पर जाकर डॉक्टर की सलाह पर अपनी जांच करांए। डॉक्टर आपसे आपको हो रही परेशानियाँ जानेगा तथा लक्षणों के आधार पर आपको परीक्षण की सलाह देगा। चिकित्सक द्वारा प्रायः कराये जाने वाले परीक्षण निम्नवत हैं।

प्रोस्टेट सम्बन्धी जाँच एवं परीक्षण

डिजिटल रेक्टल परीक्षण

इस टैस्ट में डाक्टर द्वारा अपनी उंगली रोगी के मलाशय में डाली जाती है और प्रोस्टेट ग्रंथि के आकार का परीक्षण किया जाता है।

पेशाब की जाँच (यूरिन टैस्ट)

Urine Test में आपको अपने पेशाब का सैम्पल पैथोलाजी लैब में दिया जाता है। जहाँ पर लैब टैक्नीशियन आपके यूरिन का विश्लेषण कर रिपोर्ट तैयार कर आपको उपलब्ध कराता है।

खून की जाँच (ब्लड टेस्ट)

Blood Test में आपको अपने रक्त का नमूना पैथलैब में देना होता है। जहाँ पर लैब टैक्नीशिय आपके खून का विश्लेषण कर रिपोर्ट तैयार कर आपको उपलब्ध कराता है। मुख्यतः खून का परीक्षण कि़डनी फंक्शन टैस्ट (KFT), गुर्दे सम्बन्धी समस्या के लिए किया जाता है।

प्रोस्टेट स्पेसीफिक एंटीजन टेस्ट (Prostate Specific Antigen Test)

PSA ब्लड टेस्ट का प्रयोग प्रोस्टेट सम्बन्धी विकार की जाँच में किया जाता है। पीएसए प्रोस्टेट ग्लैंड में पाया जाने वाला एक द्रव्य है। यदि आपकी पौरुष ग्रंथि का आकार बढ चुका है तो पी0एस0ए का भी स्तर बढ जाता है। इस द्रव के बढने का अन्य कारण प्रोस्टेट कैंसर या प्रोस्टेट में एंफेक्शन होने पर भी बढ सकता है।

यूरिन फ्लो टेस्ट (Urine Flow Test)

इस परीक्षण में रोगी को एक Receptacle (पात्र) में पेशाब करना होता है, जो एक मशीन से जु़ुडा होता है। यह मशीन आपके मूत्र की मात्रा, तथा बहाव की क्षमता को मापकर आपको रिपोर्ट के द्वारा बताती है कि आपको प्रोस्टेट सम्बन्धी बीमारी है या नहीं।

Postvide Residual Volume test (PSVT)

पोस्टवाइड अवशिष्ट परीक्षण का प्रयोग आपकी मूत्राशय की जाँच हेतु किया जाता है। इस PSVT परीक्षण आपके मूत्र विसर्जन करने के उपरान्त मूत्राशय में कैथेटर (Catheter) लगा दिया जाता है तथा आपके मूत्राशय में बचे पेशाब की मात्रा को मापा जाता है।

ट्रांसरेक्टल अल्ट्रासाउंड (Transrectal Ultrasound)

इस जाँच में एक अल्ट्रासाउंड प्रोब आपके मलाशय में डाला जाता है तथा प्रोस्टेट ग्लैंड के आकार की जाँच की जाती है।

प्रोस्टेट बायोप्सी (Prostate Biopsy)

इस प्रक्रिया में ट्रॉसरेक्टल की मदद से एक सुई द्वारा प्रोस्टेट के ऊतक का सैम्पल कलैक्ट किया जाता है, तथा डॉक्टर द्वारा इस सैम्पल पर प्रोस्टेट सम्बन्धी जाँच कर रिपोर्ट तैयार की जाती है।

यूरोडायनेमिक एंड प्रेशर फ्लो स्टडीज (Urodynamic and Pressure Flow Studies)

इस अध्ययन में डाक्टर द्वारा आपके मूत्रनलिका से होते हुए आपके मूत्राशय तक कैथेटर डाल दिया जाता है तथा धीरे धीरे पानी या विषम परिस्थितियों में हवा को धीरे धीरे मूत्राशय में भेजा जाता है। उसके बाद मूत्राशय में डाक्टर द्वारा प्रेशर को चैक किया जाता है कि आपके मूत्राशय (urethra) की पेशियाँ कितना काम कर रही हैं।

सिस्टोस्कोपी (cystoscopy)

यह एक लचीली ट्यूब जैसा उपकरण होता है, जिसके अगले हिस्से पर लाइट व कैमरा लगा होता है। जिसकी मदद से डाक्टर मूत्रपथ, मूत्राशय को देख पाते हैं। इस टेस्ट में रोगी को एनेस्थिया देकर बेहोश कर दिया जाता है।

प्रोस्टेट का इलाज (प्रोस्टेट बढने का इलाज in Hindi)

अन्य रोगों की भांति ही प्रोस्टेट ग्लैंड बढने का उपचार सम्भव है। आयुर्वेद, एलोपैथी, होम्यपैथी, यूनानीपैथी में प्रोस्टेट की रामबाण दवा in hindi उपलब्ध हैं जिनका प्रयोग कर प्रोस्टेट से पीड़ित व्यक्ति कोआराम मिलता है तथा वह पूर्व की भांति सामान्य दिनचर्या जी सकता है। इस लेख में हम आपको प्रोस्टेट बढ़ने की समस्या के इलाज के लिए जाँच, मेडिसिन, खान – पान, योग व्यायाम, ऑपरेशन, सर्जरी आदि के बारे में विस्तृत जानकारी देंगे।

हम भारतीय आज भी अपनी पैथी आयुर्वेदा में विश्वास रखते हैं और वाकई में यह कारगर भी है। यदि आप भी प्रोस्टेट की आयुर्वेदिक दवा के बार में जानने के इच्छक हैं तो हम आपको बता दें कि आज डाबर, हिमालय, पतंजलि, बैद्यनाथ व अन्य आयुर्वेदिक फार्मेसी भारत में मौजूद हैं, जिनके द्वारा रिसर्च करने के उपरांत प्रोस्टेट की दवा तैयार की गयी हैं। आज हम आपको कुछ विशेष पतंजलि में प्रोस्टेट की दवा, बैद्यनाथ प्रोस्टेट मेडिसिन, हिमालय मेडिसिन फॉर प्रोस्टट, व डाबर प्रोस्टेट की दवाओं के बारें में जानकारी देंगे।

Himalaya Himplasia Tablet (हिमालय हिमप्लासिआ टेबलेट)

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यह हिमालय मेडिसिन बाजार में बिना पर्चे के मिलने वाली आयुर्वेदिक गोली है। जिसका प्रयोग प्रोस्टेट सम्बन्धी रोगों के इलाज में किया जाता है। हिमालय हिमप्लासी टेबलेट मुख्यतः गोखरू, सुपारी, वरुण, शतावरी, पुट्टीकरनजा, पूंगा, अकीक, पिष्टी, बबूल, कुलथी, ग्वारपाठा जैसी आयुर्वेदिक जडीबूटी का प्रयोग कर बनाया गया है। यह दवा प्रोस्टेट की सूजन को कम करती है, यूरिन प्रोडक्शन को बढ़ाती है तथा शरीर में बन रहे बैक्टीरिया का नाश करती है।

Himalaya Prostacare (हिमालया प्रोस्टाकेअर)

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यह हिमालय मेडिसिन बाजार में बिना पर्चे के मिलने वाली आयुर्वेदिक दवा है। जिसका प्रयोग प्रोस्टेट सम्बन्धी बीमारी के इलाज में किया जाता है। हिमालय प्रोस्टाकेअर मेडिसन मुख्यतः काटीकरंज या लताकरंज, गोखरू, वरूणा, सुपारी, सतावरी आदि जैसी आयुर्वेदिक जडीबूटी का प्रयोग कर तैयार की गयी है। यह दवा प्रोस्टेट की रामबाण दवा है।

Kerala Ayurveda Prostact Tablet (केरला आयुर्वेदा प्रोस्टेक्ट टेबलेट)

Kerala Ayurveda Prostact Tablet

यह केरला आयुर्वेदा फार्मेसी द्वारा तैयार बिना पर्चे के मिलने वाली आयुर्वेदिक दवा है। जिसका प्रयोग यूरेथ्राइटिस, दर्द, यूरिन इन्फेक्शन, प्रोस्टेट बढ़ना आदि शारीरिक समस्या के निदान के लिए किया जाता है। Kerala Ayurveda Prostact Tablet मुख्यतः गोक्षुरा, वरुणा, अलसी, यसदा भष्म, वरनादि क्वाथ, सहचरा, शतावरी, चित्रका, मुरवा, विलवा, अंजली, वृहति, ब्रिहाति, करंजा, चिरूविलवा, अग्निमंथा, हरितकी, सिग्रू, दरभा, भल्लटका जैसी मूल्यवान जडीबूटियों के मिश्रण से तैयार की गयी दवा है। यह प्रोस्टेट के इलाज के लिए वरदान है।

पतंजलि आयुर्वेदिक मेडिसिन फॉर प्रोस्टेट

वर्तमान समय में बाबा रामदेव तथा आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज द्वारा स्थापित की गयी पंतजलि फार्मेसी पर लोग अत्यधिक विश्वास करते हैं। बाबा रामदेव व आचार्य बालकृष्ण महाराज द्वारा अपने ज्ञान का प्रयोग करते हुए विभिन्न बीमारियों के इलाज हेतु आयुर्वेदिक पतंजलि मेडिसिन तैयार की गयी है। आज बाजार में पतंजलि दिव्य फार्मा द्वारा तैयार भिन्न भिन्न पतंजलि मेडिसिन फॉर प्रोस्टेट भी उपलब्ध हैं, जो बिना डॉक्टर प्रिस्क्रिपशन के आसानी से पतंजलि स्टोर पर उपलब्ध हो जाती है।

पतंजलि गोक्षुरादि गुग्गुल टेबलेट

पतंजलि गोक्षुरादि गुग्गुल टेबलेट

पतंजलि दिव्य गोक्षुरादि गुग्गुल टैबलेट (Patanjali Divya Gokshuradi Guggul) आयुर्वेदिक मेडिसिन बाजार में बिना पर्चे के मिलने वाली आयुर्वेदिक दवा है। जो मुख्यतः Urinary Tract Infection (UTI) के इलाज में किया जाता है। इसके अलावा पतंजलि मेडिसिन गोखुरादि गुग्गल का प्रयोग किडनी स्टोन, प्रोस्टेट सम्बन्धी विकार तथा यौन बीमारियों के इलाज में भी किया जाता है। पतंजलि गोक्षुरादि गुग्गल टैबलेट में मुख्यतः गोखरू, आंवला, हरीतकी (हरड़), पिप्पली, बहेड़ा जैसी आयुर्वेदिक जडीबूटीयों का इस्तेमाल किया गया है। यह बैस्ट पतंजलि आयुर्वेदिक मेडिसिन फॉर प्रोस्टेट है।

पतंजलि चंद्रप्रभा वटी टैबलेट

दिव्य चंद्रप्रभा वटी 

पतंजलि दिव्य चंद्रप्रभा वटी (Patanjali Divya Chandraprabha Vati) आयुर्वेदिक मेडिसिन बाजार में बिना पर्चे के मिलने वाली आयुर्वेदिक दवा है। जो मुख्यतः Urinary Tract Infection (UTI)/यूटीआई के इलाज में किया जाता है। इसके अलावा पतंजलि मेडिसिन चंद्रप्रभा वटी का प्रयोग गुर्दे की पथरी, मूत्र सम्बन्धी विकार तथा प्रोस्टेट सम्बन्धी बीमारियों के इलाज में भी किया जाता है।

जिन व्यक्तियों में शुक्राणु की कमी के कारण वीर्य पतला होता है उनको पतंजलि में शुक्राणु बढ़ाने की दवा पतंजलि चंद्रप्रभा वटी टैबलेट का प्रयोग करना चाहिए पतंजलि चंद्रप्रभा वटी टैबलेट में मुख्यतः आंवला, कपूर, नगरामुस्ताका, अदरक, वाचा, तेज पत्ता, चव्या, ग़ज़ा पिप्पली , अतीस, धनिया जैसी आयुर्वेदिक जडीबूटियों का इस्तेमाल किया गया है। यह बैस्ट पतंजलि मेडिसिन फॉर प्रोस्टेट है।

पतंजलि विषतिन्दुक वटी टैबलेट

Patanjali Divya Vishtindukadi Vati

पतंजलि दिव्य विषतिन्दुक वटी टैबलेट (Patanjali Divya Vishtindukadi Vati) एक आयुर्वेदिक मेडिसिन है जो बाजार में बिना पर्चे के मिलने वाली दवा है। जो मुख्यतः लकवा, पार्किंसन रोग, साइटिका, नपुंसकता, कब्ज, प्रोस्टेट सम्बन्धित रोग के इलाज में किया जाता है। पतंजलि विषतिंदुक वटी में मुख्यतः काली मिर्च, सुपारी, कुचला , इमली जैसी जड़ीबूटिया का इस्तेमाल कर तैयार की गयी है। यह दवा पतंजलि में प्रोस्टेट की दवा के रूप में भी काम करती है।

पतंजलि लौकी का जूस

पतंजलि लौकी का जूस

पतंजलि दिव्य फार्मेसी द्वारा तैयार लौकी रस बिना पर्चे के मिलने वाला जूस है। लौकी के जूस में पाये जाने वाले गुण प्रोस्टेट की घरेलू दवा है। आप प्रतिदिन खाली पेट एक गिलास लौकी का रस तैयार कर पी सकते हैं।

बैद्यनाथ प्रोस्टेट मेडिसिन

बैद्यनाथ भारत की काफी पुरानी आयुर्वेदिक दवा कम्पनी है। जिस प्रकार पतंजलि संस्था द्वारा आयुर्वेदिक दवांए तैयार की जाती है, उसी तरह विभिन्न रोगों के इलाज के लिए बैद्यनाथ द्वारा भी आयुर्वेदिक दवांए तैयार की जाती हैं। पतंजलि की भांति ही बैद्यनाथ द्वारा प्रोस्टेट के इलाज के लिए बहुत सी मेडिसिन तैयार की गयी है। यहाँ हम आपको अधिक प्रयोग की जाने वाली बैद्यनाथ प्रोस्टेट मेडिसिन की जानकारी देंगे।

बैद्यनाथ प्रोस्टेड टेबलेट

बैद्यनाथ प्रोस्टेड टेबलेट

बैद्यनाथ प्रोस्टेड टैबलेट (Baidyanath Prostaid Tablet) बिना डॉक्टर के पर्चे के मिलने वाली आयुर्वेदिक बैद्यनाथ प्रोस्टेट मेडिसिन है। यह आयुर्वेदिक प्रोस्टेट की दवा मुख्यतः एनलार्ज प्रोस्टेट के इलाज में किया जाता है। बैद्यनाथ प्रोस्टेट मेडिसिन (Baidyanath Nagpur Prostaid Tablet) में मुख्यतः शिलाजीत, केसर, प्रवाल, कबाबचीनी, स्वर्ण माक्षिक भस्म, शतावरी, करांजू, वरुण छाल, चन्दन, कुटुकी, कुमारी, एलोवेरा आदि जंगली जड़ीबूटियों का प्रयोग कर बैद्यनाथ द्वारा तैयार किया गया है। इस बैद्यनाथ दवा का प्रयोग यूरिन डिजीज के लिए भी किया जाता है। यह पौरुष ग्रंथि की सूजन, दर्द को कम करती है, इसके सेवन से मूत्र विसर्जन अच्छे से होता है।

बैद्यनाथ वृद्धिवाधिका बटी

बैद्यनाथ वृद्धिवाधिका बटी

बैद्यनाथ वृद्धिवाधिका बटी (Baidyanath Vridhivadhika Bati) बिना डॉक्टर के पर्चे के मिलने वाली आयुर्वेदिक बैद्यनाथ प्रोस्टेट मेडिसिन है। यह आयुर्वेदिक एनलार्ज्ड प्रोस्टेट बैद्यनाथ प्रोस्टेट मेडिसिन है। इसके अतिरिक्त इस बैद्यनाथ की दवा का प्रयोग हर्निया, वृषण में सूजन, हाइड्रोसील आदि बीमारियों के इलाज के भी किया जाता है। इस मेडिसिन में मुख्यतः हरीतकी, अदरक, कपूर कचरी, बंग भस्म (वंग भस्म), ताम्र भस्म आदि जडीबूटियों का प्रयोग कर बैद्यानाथ फार्मा द्वारा तैयार की गयी प्रोस्टेट की दवा है।

बैद्यनाथ कांचनार गुग्गुलु

बैद्यनाथ कांचनार  गुग्गुलु

बैद्यनाथ कांचनार गुग्गुलु (Baidyanath Kanchanar Guggulu) भी बैद्यानाथ दवा संंस्था की बिना पर्चे के मिलने वाली आयुर्वेदिक प्रोस्टेट मेडिसिन है। यह आयुर्वेदिक दवा प्रोस्टेट बढने की दवा है। इसके अतिरिक्त थायराइड, अंडाशय में गांठ के इलाज में भी इस आयुर्वेदिक दवा का प्रयोग किया जाता है। इस दवा में मुख्यतः गुग्गुल, कचनार (कांचनार), त्रिकटु, त्रिफला आदि जडीबूटियों का मिश्रण है।

CSIR – CDRI वर्षों के शोध के उपरान्त औषधीय पौधों के फल का प्रयोग कर न्यूट्रास्यूटिकल (Nutraceuticals) प्रॉडक्ट तैयार किये हैं, यह उत्पाद पूर्ण रूप से सुरक्षित एवं आयुर्वेदिक हैं। जिनका प्रयोग कर आपको प्रोस्टेट सम्बंधी हर प्रकार की समस्याओं से निजात मिल सकता है।

प्रोस्टेट की एलोपैथिक दवा

एलोपैथी दवाओं का प्रयोग Prostate संबंधी बीमारियों की शुरुआती लक्षण आने पर करने पर शीघ्र आराम मिल जाता है। प्रोस्टेट की एलोपैथिक दवा के प्रयोग से प्रोस्टेट से सम्बन्धित बीमारी जैसे प्रोस्टेट का बढना, प्रोस्टेट पर सूजन, प्रोस्टेट में इंफेक्शन आदि से छुटकारा मिल जाता है।

यदि आपको एलोपैथी दवाओं का प्रयोग करते हुए काफी समय व्यतीत हो गया है तथा आपको दिन प्रतिदिन प्रोस्टेट सम्बन्धी समस्या बढ़ती जा रही है तो आप शीघ्र ही अपने डाक्टर से मिलकर परामर्श अवश्य लें। प्रोस्टेट की एलोपैथिक दवा कुछ इस प्रकार हैं परन्तु इन दवाओं का प्रयोग बिना चिकित्सक के परामर्श न करें।

प्रोस्टागार्ड-d8 कैप्सूल (Prostagard-D8 Capsule)

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Prostagard-D8 मेडिसिन का प्रयोग प्रोस्टेट ग्लैंड के इलाज तथा पेशाब सम्बन्धी समस्या एवं शौचालय जाने की जरूरत जैसे लक्षणों में राहत दिलाने में असरकारक है। इस कैप्सूल में दो दवांए सिलोडोसिन तथा ड्युटास्टेराइड को मिलाकर तैयार की गयी दवा है। सिलोडोसिन एक अल्फा ब्लाकर है यह ब्लैडर व आस पास की मांसपेशियों को आराम देता है जिससे मूत्र विसर्जन आसानी से हो वहीं ड्यूटास्टेराइड एक 5 अल्फा रिडक्टेज़ इन्हिबिटर है।

यह पुरुष के शरीर में एक विशेष एंजाइम को ब्लॉक करता है जो टेस्टोस्टेरोन को दूसरे हार्मोन में बदलने के लिए आवश्यक होता है और प्रोस्टेट के बढ़ने का कारण भी होता है। यह प्रोस्टेट के सिकुड़ने और पेशाब आने में दिक्कत जैसे लक्षणों से राहत प्रदान करता है। इसके सेवन से चक्कर आना, जी मिचलाना, वीर्य सम्बन्धी समस्या, पेट में दर्द, सर दर्द, संक्रमण, सेक्स ड्राइव में कमी, लिबिडो में कमी, पुरूषों में बूब्स इन्क्रीज होना आदि नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते हैं। इस दवा का प्रयोग डाक्टर के परामर्श पर ही करें।

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उरीमैक्स 0.4 टैबलेट (Urimax 0.4 Tablet)

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Cipla फार्मास्यूटिकल्स द्वारा तैयार दवा यूरीमैक्स 0.4 का प्रयोग मुख्यतः डाक्टर द्वारा पुरुषों में बढे हुए प्रोस्टेट के इलाज के लिए किया जाता है। प्रोस्टेट सम्बन्धी विकार के अतिरिक्त Urimax 0.4 दवा का प्रयोग गुर्दे की पुरानी बीमारी, मूत्र पथ के संक्रमण और मूत्राशय की पथरी जैसी जटिल बीमारियों के लिए भी किया जाता है।

इस दवा के प्रयोग से मूत्र विसर्जन की आवृत्ति में वृद्धि होती है। इस दवा के प्रयोग से सख्त मल, त्वचा में खुजली, उल्टी आना जी मिचलाना, लो ब्लड प्रेशर, यौन दुर्बलता आदि साइड इफेक्ट देखने को मिलते हैं। इस दवा का प्रयोग डाक्टर के परामर्श पर ही करें।

एल सिन 500 टैबलेट (L Cin 500)

L Cin 500

L Cin 500 Medicine एंटीबायोटिक दवा है, इस दवा का प्रयोग बैक्टीरियल साइनसाइटिस, निमोनिया, मूत्र पथ के संक्रमण और प्रोस्टेटाइटिस सहित विभिन्न बीमारियों के इलाज में किया जाता है। इस मेडिसिन के अत्यधिक प्रयोग से लिवर की बीमारियां, गैस सम्बन्धी बीमारी सिर दर्द, दर्द व अनिद्रा जैसी शिकायते देखी जाती है। इस दवा का प्रयोग डाक्टर के परामर्श पर ही करें।

प्रोस्टेट की होम्योपैथिक दवा

प्रोस्टेट के प्रारम्भिक लक्षण आपको अधिक परेशान नहीं करते हैं, परन्तु यदि आपके प्रोस्टेट एनलार्जमेंट के कारण इंफेक्शन बढ जाता है और पौरुष ग्रंथि में संक्रमण आ जाता है तो आपको बहुत अधिक दिक्कतों का सामना करना पड सकता है। होमोपैथी में प्रोस्टेट का उत्तम इलाज उपलब्ध है। अतः हम आपको इस आर्टीकल के माध्यम से कुछ Homeopathy Medicine की जानकारी शेयर कर रहे हैं परन्तु इन होमओपैथी दवा का प्रयोग डाक्टर की सलाह पर ही करें तो आपके लिए बेहतर होगा।

थुजा ओसिडेंटलिस

थुजा ओसिडेंटलिस

इस दवा का प्रयोग मूत्राशय सम्बन्धी विकार, शिश्न संबंधी विकार, एवं टेक्टिक्स संबंधी विकार में मुख्यतः किया जाता है। साथ ही डाक्टर द्वारा प्रोस्टेट बढने संबंधी लक्षणों में इस दवा को चलाया जाता है।

स्टैफिसैग्रिया

स्टैफिसैग्रिया

इस दवा का प्रयोग मूत्राशय सम्बन्धी विकार, तथा यौन संबंधी विकार में मुख्यतः किया जाता है। साथ ही डाक्टर द्वारा प्रोस्टेट बढने संबंधी लक्षणों में इस दवा को चलाया जाता है।

सबल सेरुलता

सबल सेरुलता

इस दवा का डाक्टर द्वारा बढे हुए प्रोस्टेट के रोगी, गोनोरिया के लिए किया जाता है साथ ही इसका प्रयोग थकान, सैक्सुअल एंजाइटी, मूत्र संबंधी रोग, सैक्स लिबिडो, व अन्य यौन रोगों में किया जाता है।

लाइकोपोडियम क्लैवेटम

लाइकोपोडियम क्लैवेटम

इस दवा का प्रयोग भी होमोपैथिक डाक्टर द्वारा मूत्र मार्ग सम्बंधी विकार, जननांग संबंधी बीमारी तथा प्रोस्टेट के इलाज में किया जाता है।

डिजिटलिस परप्यूरिया

डिजिटलिस परप्यूरिया

इस होमोपैथी दवा का प्रयोग प्रोस्टेट के बढने सम्बन्धी रोग, हृदय रोग तथा गोनोरिया आदि में किया जाता है साथ ही डाक्टर द्वारा सुस्ती, फोमोसिस, जननांग संबंधी रोगों के इलाज में भी इसका किया जाता है।

कोनियम मैक्यूलेटम

कोनियम मैक्यूलेटम

इस दवा का प्रयोग मुख्यतः शारीरिक व मानसिक थकान, सैक्स डिजायर, यूरिन संबंधी समस्या, वृषण संबंधी बीमारी, स्तंभन दोष में किया जाता है, परन्तु साथ ही प्रोस्टेट के बढने जैसी बीमारी में भी डाक्टर द्वारा यह दवा सजैस्ट की जाती है।

चिमाफिला अम्बेलाता

चिमाफिला अम्बेलाता

इस दवा का प्रयोग डाक्टर द्वारा यूरिन डिजीज, प्रोस्टेटिक फ्लूड, प्रोस्टेट सूजन में किया जाता है।

बरयेटा कार्बोनिका

बरयेटा कार्बोनिका

बरयेटा कार्बोनिका का प्रयोग डाक्टर द्वारा मानसिक रूप से कमजोर रोगी, वृषण संबंधी रोग, पेशाब संबंधी बीमारी, इम्पोटेंसी, सैक्स डिजाअर जैसी बीमारियों के इलाज में किया जाता है।

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बढे हुए प्रोस्टेट के घरेलू उपचार

यदि आप वर्तमान समय में प्रोस्टेट के प्रारम्भिक लक्षण महसूस कर रहे हैं, तो आप नीचे बताए गये प्राकृतिक उपचार का प्रयोग कर प्रोस्टेट के दर्द में आराम पा सकते हैं।

सिट्स स्नान

जैसा कि हम जानते हैं गर्म (गुनगुना) पानी चिकित्सा पद्यति में प्राचीन समय से प्रयोग किया जाता रहा है। गर्म पानी से नहाने पर सूजन तथा शरीर से हानिकारक रोगाणु दूर होते हैं। सिट्स बाथ के लिए आप एक टब में गर्म पानी ले और उसमें सैंधा नमक डाल लें साथ एक टब में साधारण पानी भर लें और इसमें कुछ लेवेंडर तेल की बूंदे डाल ले।

पहले आप गर्म पानी कुछ समय बैंठे तथा उसके उपरांत साधारण पानी वाले टब में बैंठे। उसके बाद आप प्रतिदिन की तरह स्नान ले सकते हैं इस टैक्नीक को बेहतर लाभ के लिए सप्ताह में कम से कम दो बार अवश्य प्रयोग करें।

Stinging nettle (Urtica dioica)

स्टिंगिंग नेटल BPH के प्रभाव को कम करने में मदद करता है। मुख्यतः यह पौरुष ग्रंथि को सिकुडने में प्रयोग किया जाता है साथ ही ये मूत्र के साथ इंफ्लेमेटरी अपशिष्ट को शरीर से बाहर निकाल देता है। इस को प्रयोग करने के लिए एक कप पानी में सूखे नेटल लीफ (कंडाली) डाले तथा 10 मिनट तक अग्नि पर पकायें उसके बाद इसको छान लें तथा कुनकुना होने पर इसका सेवन करें। इस विधि का प्रतिदिन दिन में दो बार प्रयोग लाभदायक होगा।

कॉर्न सिल्क (Corn Silk)

ताजा भुट्टे से प्राप्त होने वाले रेशों को कार्न सिल्क बोला जाता है, यह मूत्र प्रवाह की आवृत्ति को बढ़ाने के गुण रखता है साथ ही प्रोस्टेट की सूजन तथा आकार को कम करने की क्वालिटी भी इसमें विद्यमान है।

इसका प्रयोग करने के लिए एक वर्तन में चार कप पानी ले और उसमें कुछ कार्न सिल्क डाल कर उबाल लें तथा इसके बाद 10 मिनट तक उबालते रहें तथा ठण्डा हो जाने पर इसको छान कर प्रतिदिन ताजा तैयार करते हुए इसका सेवन करें। इस विधि का प्रतिदिन दिन में दो बार प्रयोग लाभदायक होगा।

ग्रीन टी (Green Tea)

जैसा कि आपने टी0वी0 पर विज्ञापन में भी सुना होगा कि ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाये जाते हैं, अतः ग्रीन टी के सेवन से भी प्रोस्टेट बढने जैसी बीमारी में लाभ मिलता है।

पाइजियम (Pygeum)

पाइजियम (Pygeum Africanum) एक आयुर्वेदिक जडीबूटी है जो अफ्रीकन आलूबुखारे (बेर) में पाया जाता है। जिसमें एंटी इन्फ्लेमेट्री तथा एंटी ऑक्सीडेंट गुण पाये जाते हैं। पाइजेम किडनी, प्रोस्टेट, व मूत्राशय सम्बन्धी बीमारी के इलाज में प्राचीन समय से प्रयोग की जाती रही है। यह आपके शरीर में मूत्र विसर्जन की आवृत्ति को बढा देती है जिसके चलते पेशाब मार्ग से वेस्ट मेटेरियल शरीर से बाहर आ जाते हैं तथा बाडी डिटाक्स हो जाती है।

कुकुर्बिटा (Cucurbita)

कुकुरबिटा / क्यूकरबिट परिवार से सम्बन्धित सब्जी व फल जैसे सीताफल, लौकी, तोरई आदि  बीटा-सीटोस्टेरॉल नामक यौगिक का एक स्रोत है, यह तत्व मानव शरीर में पेशाब के उत्पादन को बढा देता है जिससे मूत्र विसर्जन अधिक होता है और प्रोस्टेट के लक्षणों में आराम प्राप्त होता है।

ऑरबिग्न्या (Orbignya)

बबस्सू के पेड / ताड़ (Palm) के पेड़ से प्राप्त होने वाली बूटी है । इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। यह टेस्टोस्टेरोन के स्राव को कम करने और प्रोस्टेट ग्रंथि की वृद्धि को रोकने में मदद करता है।

लाइकोपीन (Lycopene)

लाइकोपेन लाल चमकदार कैरोटीन और कैरोटीनॉयड रंगद्रव्य और फिटोकेमिकल है, जो टमाटर, गाजर, तरबूज व अन्य फल व सब्जियों में मौजूद रहता है। यह प्रोस्टेट ग्रंथि के विकास को रोकने की औषधीय गुण रखता है।

अलसी

अलसी के बीज को बढे हुए प्रोस्टेट व अन्य प्रोस्टेट बीमारियों के लिए उपयोगी औषधि माना गया है। अलसी के बीज का पाउडर बना लें प्रतिदिन 20 ग्राम अलसी के पाउडर का पानी के साथ सेवन आपको शर्तिया लाभ देगा।

सोयाबीन

सोयाबीन के सेवन से टेस्टोस्टेरान लेवल में कमी आती है, आपको प्रतिदिन सोयाबीन का सेवन करना होगा जिससे आपके प्रोस्टेट सम्बन्धी सभी लक्षण जल्द ही ठीक होते महसूस होंगे।

पानी

पानी हर मर्ज की रामबाण दवा है। प्रतिदिन 7 से 8 गिलास पानी के सेवन आपके शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलने लगते हैं और आपका प्रोस्टेट खुद व खुद अपने को क्योर करने लगेगा।

पलाश (ढ़ाक)

पलाश के फूलों को एक गिलास पानी में उबाल लें और गुनगुना होने पर इस पानी में कपडा भिगोकर अपने टेस्टीकल एरिया की सिकाई करें। इस नुस्खे से आपके बढे  हुए प्रोस्टेट में राहत मिलेगी।

प्रोस्टेट के लिए योग व आसन

योग के माध्यम से आप आसानी से अपने प्रोस्टेट की वृद्धि को रोकते हुए कम कर सकते हैं। वर्तमान समय में पुरुषों में प्रोस्टेट ग्लैंड की समस्या बढ गयी है। यदि इसका समय से इलाज नहीं होता है तो भविष्य में पुरुष को खतरनाक बीमारी का सामना करना पड सकता है। यहाँ हम आपको कुछ योगासन के बारे में बतायेंगे जिनका प्रयोग कर आप अपने प्रोस्टेट को स्वस्थ बना सकते हैं।

  • वज्रासन
  • भुजंगासन
  • गोमुखासन
  • वक्रासन
  • अर्धमत्येंद्रासन
  • योगमुद्रासन
  • स्थिति कोणासन
  • चक्रासन

प्रोस्टेट कम करने के अन्य उपाय

  • प्रतिदिन टहलें, साइक्लिंग करें आप स्विमिंग भी ट्राइ कर सकते हैं।
  • तनाव से दूर रहें।
  • यदि आप धूम्रपान करते हैं तो आज ही छोड दें।ट
  • पानी पीने की आदत डालें।
  • रैड मीट, डेयरी प्राडक्ट्स, मिर्च मसालों का सेवन कम कर दें।

FAQ

प्रोस्टेट में क्या नहीं खाना चाहिए?

उत्तर – यदि आप प्रोस्टेट बढने की समस्या से जूझ रहे हैं तो आपको तत्काल गोभी, दही, अरहर, मलका मसूर, लोबिया, काबुली चना, तथा तेज मसालेदार एवं चिकनाई युक्त खान पान को बन्द करना होगा। साथ ही गुड, लाल मिर्च, मिठाई, तेल, अचार, मसाले, सम्भोग तथा अधिक व्यायाम से परहेज करना आवश्यक है।

प्रोस्टेट में क्या खाना चाहिए?

प्रोस्टेट की बीमारी होने पर हैल्दी एवं डाइजेस्टिव भोजन का सेवन करें। लौकी, तरोई, टिण्डा, परवल, गाजर, टमाटर, पालक, मेथी, बथुआ, चौलाई, कुलफा तथा फलों में तरबूज, खरबूज, पपीता, ककडी, खीरा, अमरूद, खुबानी आदि का सेवन बढा दें। साथ ही आप मूंग की दाल का प्रयोग भी कर सकते हैं।

 प्रोस्टेट का साइज कितना होना चाहिए?

प्रोस्टेट का सामान्य वजन 18 से 20 ग्राम होना चाहिए, हांलाकि हमने आपको बताया है कि प्रोस्टेट की वृद्धि प्रतिवर्ष 1 से 2 ग्राम होती है परन्तु जब आपके प्रोस्टेट का साइज 100 ग्राम हो जाता है तो प्रोस्टेट कैंसर होने के चांस बढ जाते हैं। अतः अपने प्रोस्टेट का साइज 100 ग्राम न होने दें बेहतर इलाज लें।

प्रोस्टेट ठीक होने में कितना समय लगता है?

यदि आपका प्रोस्टेट बढ गया है तो इसे कम होने में काफी समय लगता है। अधिकतर केसेज में प्रोस्टेट सब्सिडाइज हो पाता है और पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं हो पाता है।

प्रोस्टेट के कितना वजन बढ़ने पर किडनी पर असर पड़ता है?

प्रोस्टेट का वजन 24 ग्राम होने तक किडनी पर कोई असर नहीं पडता है परन्तु इससे अधिक होने पर आपको किडनी संबंधी समस्याओं का सामान करना पड सकता है।

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