वीर्य की कमी के लक्षण क्या है? | शुक्राणु बढ़ाने के लिए अपनाये ये घरेलू उपाय

पुरुषों में शारीरिक कमजोरी के कारण विभिन्न प्रकार की समस्याएं होती हैं। जिनके कारण पुरुषों में विभिन्न प्रकार के अन्य समस्याएं होने लगती हैं। इन सभी समस्याओं से बचने के लिए सेक्स समस्याओं से बचने की आवश्यकता होती है पुरुषों में वीर्य की कमी एक मुख्य समस्या होती है। वीर्य की कमी के कारण पुरुषों के शरीर में विभिन्न प्रकार के वीर्य की कमी के लक्षण क्या है तथा समस्याएं देखने लगते हैं। वीर्य की कमी के कारण पुरुषों के शरीर में प्रजनन क्षमता कमजोर हो जाती है, तथा सेक्स समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं, जिसके कारण उनको विभिन्न प्रकार के समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अतः वीय की कमी के लक्षण को देखते इससे बचने के उपाय सोचने चाहिए।

वीर्य क्या है

वीर्य क्या है

पुरुषों के शरीर में वीर्य पाया जाता है, जो कि टेस्टिस में निर्मित होता है। वीर्य शुक्राणुओं तथा कुछ विशेष प्रकार के हारमोंस और प्रोटीन का मिश्रण होता है, जिसमें प्रोटीन तथा शुक्राणु अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। शुक्राणु पुरुषों में प्रजनन क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं। अर्थात शुक्राणु मादा के अंडों से मिलकर निषेचन क्रिया के पश्चात गर्भधारण हो जाता है।

अतः महिलाओं को गर्भवती बनाने के लिए शुद्ध तथा स्वास्थ्य शुक्राणु की आवश्यकता होती है, जो गाढ़े वीर्य में ही उपलब्ध होते हैं, क्यों कि गाढे वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या अधिक मात्रा में होती है, जिसके कारण वीर्य गाढ़ा होता है। अतः वीर्य में शुक्राणु तथा इंजॉइम व प्रोटीन होता है।

शुक्राणु क्या है

शुक्रवार पुरुषों के जननांग में पाया जाता है, जिसका निर्माण टेस्टिस द्वारा किया जाता है। टेस्टिस में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की सहायता से शुक्राणु का निर्माण किया जाता है, जो पुरुषों में प्रजनन क्षमता के लिए जिम्मेदार होता है।

शुक्राणु महिलाओं के अंडों से मिलकर भ्रूण का निर्माण करते हैं, जिसके पश्चात गर्भाशय से एक शिशु का जन्म होता है, तथा कुछ समय पश्चात मां के द्वारा एक बच्चे को जन्म दिया जाता है। शुक्राणु अपने शरीर के तीन हिस्सों में विभाजित होता है- हेड, मिडिल तथा टेल जिसके कारण वह महिला के गर्भाशय में पहुंचने में सहायक होता है।

सक्रिय शुक्राणु क्या है?

सक्रिय शुक्राणु क्या है

जब पुरुष द्वारा महिला के गर्भाशय में शुक्राणु स्खलित किए जाते हैं तो इसमें कुछ शुक्राणु सक्रिय करता कुछ निष्क्रिय होते हैं, जो शुक्राणु अधिक सक्रिय होते हैं, वह तेजी से दौड़ते हुए गर्भाशय में अंडों के साथ निषेचन के लिए पहुंच जाते हैं, और जो शुक्राणु सबसे पहले अंडों के साथ निषेचित होता है।

उसी के द्वारा भ्रूण का निर्माण होता है निकले हुए सभी शुक्राणुओं में कुछ शुक्राणु दाहिने ओवम और उनके तरफ तथा कुछ बाय ओवम की तरफ तथा कुछ सीधे दिशा में दौड़ लगाते हैं।

किंतु उस समय जो ओवम सक्रिय होता है, उसी के द्वारा भ्रूण का निर्माण होता है, बाकी शुक्राणु निष्क्रिय हो जाते हैं। शुक्राणु का जीवनकाल सामान्य रूप से 20 मिनट तक का होता है किंतु कुछ समय महिला के गर्भाशय में शुक्राणु 1 से 2 दिन तक जीवित रहते हैं। जिन शुक्राणुओं द्वारा भ्रूण का निर्माण होता है वे सक्रिय निर्माण शुक्राणु कहलाते हैं।

शुक्राणु की संख्या

पुरुषों के वीर्य में शुक्राणु संख्या उनकी शारीरिक शक्ति पर निर्भर करती है यदि पुरुषों की शारीरिक शक्ति अच्छी होती है तथा उनके शरीर में पर्याप्त रूप से शुक्राणु निर्माण होता है, तो उनके शरीर में स्वस्थ शुक्राणुओं की संख्या अच्छी मात्रा में होती है। शुक्राणु की संख्या से तातपर्य है एक सीमेन के नमूने यानि सैंपल में 40-300 मि.ली शुक्राणु होना आवश्यक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक अगर किसी के सीमेन सैंपल में शुक्राणु की मात्रा 15 मि.ली से  कम है तो उस पुरुष को पिता बनने में परेशानी होगी।

शरीर में शुक्राणु संख्या बढ़ाने के लिए शारीरिक रूप से मजबूत होना बहुत आवश्यक होता है। शारीरिक शक्ति के विकास के लिए विभिन्न प्रकार के पौष्टिक खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जो हमारे शरीर को ताकत प्रदान करते हैं जिसके द्वारा हमारे शरीर में शुक्राणु निर्माण तेजी से होता है शुक्राणु निर्माण तेजी से बढ़ने के कारण हमारा वीर्य गाढ़ा हो जाता है, इसका मतलब होता है कि हमारे वीर्य में शुक्राणु संख्या बढ़ गई है अतः वह अच्छे प्रजनन के लिए तैयार हो गया है। 

शुक्राणु की गति

शुक्राणु की गति शुक्राणु के स्वास्थ्य पर निर्भर करती है कि शुक्राणु कितना स्वस्थ है और शुक्राणु के स्वस्थ होने के निर्भरता व्यक्ति के स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। यदि स्वस्थ मनुष्य के शरीर में स्वस्थ शरीर का निर्माण होता है, तो निश्चित रूप से विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक एक सीमेन के सैंपल में 40% शुक्राणु सक्रिय होने चाहिए और उनकी गति 25μm/s होना आवश्यक है।

शुक्राणु अपनी तीव्र गति से जितना तेज दौड़ता है वह उतना अधिक स्वस्थ होता है और स्वास्थ्य शुक्राणु से स्वास्थ्य भ्रूण का निर्माण होता है जिससे कुछ समय पश्चात स्वस्थ शिशु जन्म लेता है। 

शुक्राणु में कमी क्या है

शुक्राणु में कमी क्या है

पुरुषों के शरीर में शारीरिक कमजोरी होने के कारण उनका वीर्य पतला हो जाता है वीर्य पतले होने के मुख्य कारण मनुष्य के शरीर में कम शुक्राणु का निर्माण होना है, क्योंकि कम शुक्राणु निर्माण होने के कारण वीर्य में कम शुक्राणु होते हैं, जिनके कारण वीर्य पतला हो जाता है, मतलब यह गर्भधारण के लिए उपयुक्त नहीं होता है, क्योंकि उसमें स्वस्थ शुक्राणु नहीं होते हैं। अतः हमें यह सोचना चाहिए कि शरीर में शुक्राणु की कमी कैसे पूरी की जा सकती है,

शरीर में शुक्राणु की कमी को पूरा करने के लिए शरीर की शारीरिक शक्ति को मजबूत बनाने की आवश्यकता होती है। जिससे आपको विभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों तथा पदार्थों का सेवन करना चाहिए, जिससे शरीर को शारीरिक शक्ति प्राप्त होती है।

शारीरिक शक्ति प्राप्त होने के कारण हमारे टेस्टिस में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का श्रावण पर्याप्त मात्रा में होता है, जिसके कारण टेस्टिस में तेजी से शुक्राणु निर्माण प्रारंभ हो जाता है। शुक्राणु निर्माण तेजी से होने के कारण वीर्य गाढ़ा हो जाता है, तथा शुक्राणु कमी समाप्त हो जाती है शुक्राणु की कमी से निम्नलिखित समस्याएं होती हैं।

  • वीर्य पतला हो जाता है
  • शीघ्रपतन की समस्या होती है
  • प्रजनन क्षमता कमजोर हो जाती है
  • सेक्स टाइमिंग कम हो जाती है

शुक्राणु की कमी के कारण

शुक्राणु की कमी का मुख्य कारण शारीरिक कमजोरी होती है। शारीरिक कमजोरी होने के कारण से प्राण निर्माण नहीं होता है। जिसके कारण हमारे शरीर में विभिन्न हर की समस्याएं होती हैं जिनमें वीर्य का पतलापन तथा विभिन्न प्रकार के सेक्स समस्या मुख्य रूप से होती हैं। शुक्राणु की कमी के कारण सबसे मुख्य समस्या होती है।

वह होता है पुरुष बांझपन जिसके कारण पुरुष प्रजनन क्षमता के लिए तैयार नहीं होते हैं, तथा उनके प्रजनन क्षमता कमजोर हो जाती है या फिर समाप्त हो जाती है, जिसके कारण उनके द्वारा कभी महिला को गर्भवती नहीं किया जा सकता है, क्योंकि उनके शुक्राणु बहुत कमजोर होते हैं। जिसके कारण उनके वीर्य बहुत पतला हो जाता है। हमारे शरीर में शुक्राणु कम होने के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं

  • गुप्तांग में संक्रमण
  • वैरीकोसेल
  • हार्मोन असंतुलन
  • स्खलन समस्याएं
  • ट्यूमर की समस्या
  • गुप्तवृषणता
  • सीलिएक रोग
  • शुक्राणु वाहिनी में दोष

गुप्तांग में संक्रमण

गुप्तांग में संक्रमण

गुप्तांग में संक्रमण होने के कारण वहां पर टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का श्रावण नहीं हो पाता है जिसके कारण टेस्टिस में शुक्राणु निर्माण नहीं होता है अर्थात शुक्राणु निर्माण को बढ़ाने के लिए भुगतान में होने वाले संक्रमण को ठीक करने की आवश्यकता होती है जिससे अत्यधिक शुक्राणु निर्माण हो सके।

वैरीकोसेल

वैरीकोसेल अंडाशय में होने वाली एक बीमारी होती है जिसमें अंडा में स्थित कुछ  नसों का आकार बढ़ जाता है जिसके कारण अंडाशय में सूजन आ जाती है। जिससे पुरुषों में प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है जिसके कारण पुरुषों में वीर्य निर्माण बंद हो जाता है।

वैरीकोसेल की समस्या होने के कारण पुरुषों में जब वीर्य निर्माण बंद हो जाता है, वीर्य निर्माण बंद हो जाने के कारण शुक्राणुओं की संख्या वीर्य में कम हो जाती है तथा वीर्य पतला हो जाता है जिसके कारण पुरुषों में प्रजनन क्षमता कमजोर हो जाती है। इसलिए पुरुषों में होने वाली वैरीकोसेल बीमारी पुरुषों में वीर्य की कमी का एक प्रमुख कारण माना जाता है।    

हार्मोन असंतुलन

पुरुषों में विशेष प्रकार की  बीमारी तथा विभिन्न प्रकार की समस्याओं के कारण शारीरिक कमजोरी हो जाती है। जिसके कारण शरीर में हारमोंस असंतुलित हो जाते हैं, जिसके कारण विभिन्न प्रकार की शारीरिक क्रियाओं मैं प्रभाव पड़ता है। इसी प्रकार शरीर की शारीरिक शक्ति कमजोर होने के कारण पुरुषों में पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरोन की कमी हो जाती है।

जिसके कारण टेस्टिस में शुक्राणु निर्माण बंद हो जाता है, या कम हो जाता है शुक्राणु निर्माण होने के कारण पुरुषों में वीर्य पतला हो जाता है। जिसके कारण पुरुषों की प्रजनन क्षमता कमजोर हो जाती है तथा वह किसी भी महिला को गर्भवती करने में असमर्थ होते हैं। अतः हार्मोन असंतुलन पुरुषों में वीर्य की कमी का एक प्रमुख कारण माना जाता है।

स्खलन समस्याएं

स्खलन समस्याएं

पुरुषों में शुक्राणु निर्माण तथा वीर्य निर्माण का एक लंबा प्रोसेस होता है जिसमें हारमोंस के सहायता से शुक्राणु निर्माण होता है। उसके पश्चात शुक्राणु परिपक्व होने के लिए कुछ समय तक टेस्टिस में ही रुकते हैं, उसके बाद ही शुक्राणु प्रजनन क्षमता के लिए तैयार होते हैं, यह प्रोसेस काफी लंबा होता है। इसलिए शुक्राणु निर्माण में काफी समय लगता है जिसके कारण शरीर में एक निश्चित मात्रा से अधिक शुक्रवार निर्माण तथा वीर्य निर्माण नहीं हो पाता है।

किंतु आधुनिक समय में कुछ व्यक्ति 1 दिन में अत्यधिक बार सेक्स करके या फिर कुछ व्यक्ति गलत संगत में पड़कर हस्तमैथुन आदि क्रियाओं का सहारा लेते हैं, जिनके द्वारा वीर्यपात करके वीर को बर्बाद किया जाता है।

अतः 1 दिन में अधिक वीर्य स्खलन करके वीर्य को बर्बाद करना के कारण शरीर में वीर्य की कमी हो जाती है, क्योंकि जितना वीर्य स्खलित हो जाता है। दैनिक रूप से उतने वीर्य का निर्माण शरीर द्वारा नहीं हो पाता है। अतः वीर्य बहुत अधिक पतला हो जाता है अत्यधिक वीर्य स्खलन वीर्य की कमी का कारण हो सकता है।

ट्यूमर की समस्या

शरीर के किसी भी अंग में ट्यूमर हो जाने के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। जिसके कारण शरीर कमजोर हो जाता है, शरीर के कमजोर हो जाने के कारण हमारे शरीर में शारीरिक शक्ति कमजोर हो जाती है। हमारे शरीर की शारीरिक शक्ति कमजोर हो जाने से हमारे शरीर में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्राव पर्याप्त मात्रा में नहीं होता है।

पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरोन का श्रावण पर्याप्त मात्रा में ना होने के कारण टेस्टिस में शुक्राणु निर्माण नहीं हो पाता है जिसके कारण वीर्य पतला हो जाता है। अतः यदि किसी व्यक्ति को उनकी उम्र की समस्या हो जाती है तो वीर्य में शुक्राणु की कमी हो जाने के कारण पीर की कमी हो जाती है क्योंकि हमारे शरीर में पर्याप्त शुक्राणु निर्माण नहीं हो पाता है।

वीर्य की कमी के लक्षण क्या है- गुप्तवृषणता

गुप्तवृषणता

जिस समय अपरिपक्व  शिशु जन्म लेता है तो कभी-कभी छोटे बच्चों में गुप्तवृषणता दिखाई देती है जिसमें दोनों अंडकोष या दोनों में से एक अंडकोष नहीं रहता है, जिसे हम गुप्तवृषणता के नाम से जानते हैं।

यह गर्भाशय में पूर्ण रूप से शिशु का विकास ना होने के कारण होता है, जिसके कारण पुरुष जीवन में वीर्य निर्माण में कमी हो जाती है, और पुरुष पर्याप्त रूप से प्रजनन क्षमता धारण करने में असमर्थ होता है, अर्थात पुरुष प्रजनन क्षमता गुप्तवृषणता  के कारण कमजोर हो जाती है, और पुरुषों में वीर्य की कमी हो जाती है। पुरुषों में वीर्य की कमी का मुख्य कारण गुप्तवृषणता भी हो सकता है।

सीलिएक रोग

सीलिएक रोग पाचन से संबंधित एक विशेष प्रकार की बीमारी होती है जिसमें पेट में स्थित छोटी आंख में सूजन आ जाती है छोटी आंत में सूजन आ जाने के कारण पेट में दर्द ऐठन तथा पाचन संबंधी विभिन्न प्रकार की समस्याएं होने लगती हैं।

जिसके कारण हमारे शरीर में छोटी नाथद्वारा पोषक तत्वों को अवशोषित नहीं किया जाता है, पोषक तत्व को अवशोषित ना करने के कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण कमजोरी हो जाती है।

शारीरिक कमजोरी हो जाने के कारण वीर निर्माण कमजोर हो जाता है। जिसके कारण शुक्राणुओं की कमी हो जाती है शरीर में शुक्राणु की कमी होने के कारण वीर्य पतला हो जाता है। अतः सीलिएक रोग पुरुषों में वीर्य की कमी का एक प्रमुख कारण माना गया है, जो वीर्य में शुक्राणुओं की कमी के कारण शरीर में वीर्य की कमी उत्पन्न कर देता है।

शुक्राणु वाहिनी में दोष

पुरुषों के जनन तंत्र में किसी प्रकार के संक्रमणीय दोष के कारण पुरुष के प्रजनन क्षमता कमजोर हो जाती है, क्योंकि पुरुषों के प्रजनन अंग तथा शुक्राणु वाहिनी में दोष होने के कारण शुक्राणु निर्माण नहीं हो पाता है। जिसके कारण वीर्य पतला होता है, वीर्य पतला होने के कारण पुरुषों की प्रजनन क्षमता कमजोर हो जाती है। अतः शरीर में वीर्य की कमी हो जाती है, शुक्राणु वाहिनी में तो शरीर में वीर्य की कमी का एक प्रमुख कारण माना गया है।

वीर्य की कमी के लक्षण क्या है

मानव शरीर में वीर्य का मुख्य कार्य प्रजनन के लिए प्रयोग में किया जाता है, किंतु प्रजनन क्रिया से पहले महिलाओं में प्रजनन धारण करने के लिए पुरुष द्वारा विभिन्न प्रकार की क्रियाएं की जाती हैं, अर्थात पुरुषों को महिला के गर्भाशय तक वीर्य पहुंचाने के लिए विभिन्न प्रकार की क्रियाओं से गुजरना होता है।

जिसमें अंतिम लक्ष्य वीर्य को गर्भाशय तक पहुंचाना होता है, जिसमें विभिन्न प्रकार के शुक्राणु उपस्थित होते हैं, जो महिलाओं के अंडाशय से मिलकर किसी एक अंडे के साथ निषेचन क्रिया करके भ्रूण का निर्माण करते हैं।

वीर्य में शुक्राणु की कमी होने के कारण शुक्राणुओं को महिला के अंडाशय तक पहुंचाने में प्रयोग होने वाली सभी प्रकार की शारीरिक क्रियाओं को प्रभावित करती हैं। जिसमें पुरुषों में कामेच्छा की कमी एक मुख्य कारण होती है, अर्थात वीर में उपस्थित शुक्राणु को स्खलित करने में प्रयोग की जाने वाली क्रियाएं वीर्य की कमी के कारण प्रभावित होती हैं। वीर्य में शुक्राणुओं की कमी से निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं।

  • पुरुषों में सेक्स पावर की कमी।
  • शीघ्र स्खलन की समस्या।
  • लिंग में पर्याप्त तनाव ना आना।
  • प्रजनन क्षमता कमजोर हो जाना।
  • शुक्राणुओं की कमी के कारण वीर्य पतला हो जाना।
  • पुरुषों में नपुंसकता।
  • पुरुषों में बाँझपन।

पुरुषों में सेक्स पावर की कमी

पुरुषों में सेक्स पावर की कमी

पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी के कारण वीर निर्माण कम होता है वीर्य की कमी हो जाने के कारण विभिन्न प्रकार की समस्याएं होने लगती हैं। जिसमें पुरुषों की सेक्स समस्याएं मुख्य रूप से होती हैं पुरुषों में सेक्स पावर की कमी वीर्य की कमी के कारण होता है।

जिससे पुरुषों में सेक्स पावर की कमी हो जाती है, पुरुषों में सेक्स पावर की कमी के कारण पुरुष सेक्स क्रिया करने में असमर्थ होते हैं। उनको सेक्स से संबंधित विभिन्न प्रकार की समस्याएं हो जाती हैं, जिससे वह सेक्स क्रिया करने के लिए समर्थ नहीं होते हैं।

शीघ्र स्खलन की समस्या

पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी के कारण वीर्य पतला हो जाता है जिसके कारण पुरुषों में वीर्य पतन तथा शीघ्र स्खलन की समस्या होने लगती है। जिसके कारण सेक्स करते समय अति शीघ्र वीर्य स्खलित हो जाता है शीघ्र स्खलन एक ऐसी बीमारी है, जिसमें सेक्स क्रिया करते समय पुरुष जैसे सेक्स क्रिया के लिए तैयार होता है, और सेक्स क्रिया प्रारंभ करता है 2 मिनट के अंदर है, पुरुष के लिंग से शीघ्र स्खलन हो जाता है।

वीर्य पतला होने के कारण बहुत जल्दी स्खलित हो जाता है तथा यह प्रजनन क्षमता के लिए सही नहीं होता है, क्योंकि इसमें शुक्राणुओं की संख्या बहुत कम होती है तथा इस में उपस्थित शुक्राणु स्वस्थ नहीं होते हैं। 

लिंग में पर्याप्त तनाव ना आना

पुरुषों के वीर्य में शुक्राणु संख्या कमी होने के कारण वीर्य पतला हो जाता है तथा पुरुष के लिंग में उपस्थित मांसपेशियों में कमजोरी हो जाती है। लिंग की नसों में कमजोरी होने के कारण लिंग कमजोर हो जाता है, लिंग कमजोर होने के कारण उसमें पर्याप्त तनाव नहीं आता है। जिसके कारण लिंग में सेक्स समस्याएं होने होने लगती जिसके कारण ले में पर्याप्त तनाव नहीं आता है।

लिंग में पर्याप्त तनाव ना आने के कारण पुरुष महिला साथी के साथ सेक्स किया करने में असमर्थ होता है तथा सेक्स क्रिया करते समय सेक्स से संतुष्ट प्राप्त नहीं होती है तथा शीघ्रपतन की समस्या अतिशीघ्र हो जाती है।

प्रजनन क्षमता कमजोर हो जाना

पुरुष के शरीर में विभिन्न प्रकार के कमजोर होने के कारण शुक्राणु निर्माण जब कम हो जाता है तो इसमें पतलापन हो जाता है। वीर्य में पतला होने के कारण वीर गर्भधारण के लिए उपयुक्त नहीं होता है, क्योंकि इसमें उपस्थित शुक्राणु अस्वस्थ होते हैं, अथवा कमजोर होते हैं।

यदि ऐसे वीर्य द्वारा गर्भधारण किया जाता है, तो पैदा होने वाला बच्चा विभिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो सकता है अतः पतले वीर्य कारण पुरुषों में प्रजनन क्षमता कमजोर हो जाती है।

शुक्राणुओं की कमी के कारण वीर्य पतला हो जाना 

शुक्राणुओं की कमी के कारण वीर्य पतला हो जाता है क्योंकि वीर्य में अत्यधिक मात्रा शुक्राणुओं की होती है जिसके कारण वीर्य गाढ़ा तथा सफेद दिखाई देता है। शुक्राणुओं की कमी के कारण भीड़ में पतलापन हो जाता है, तथा हुआ बहुत पतला तथा पानी के जैसा दिखाई देने लगता है। पतले वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम होती है, तथा उसमें उपस्थित शुक्राणु बहुत ही कमजोर होते हैं।

शुक्राणु कमजोर होने के कारण प्रजनन क्षमता कमजोर होती है। अतः शुक्राणुओं की कमी के कारण वीर्य बहुत पतला हो जाता है, जिसके कारण विभिन्न प्रकार की समस्याएं होती हैं। शीघ्रपतन बहुत जल्दी हो जाता है पुरुषों में कामेच्छा की कमी हो जाती है।

पुरुषों में नपुंसकता

पुरुषों में नपुंसकता

पुरुषों के वीर्य में शुक्राणुओं की कमी के कारण वीर्य अत्यधिक पतला होता है जिसके कारण यह वीर्य अस्वस्थ शुक्राणुओं से युक्त होता है यह शुक्राणु प्रजनन क्षमता के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं।

यदि कोई महिला ऐसे वीर्य से गर्भधारण कर भी रहती है, तो उससे होने वाला बच्चा अस्वस्थ तथा कमजोर होता है। अधिकतर पुरुषों में कमजोर वीर्य के कारण अर्थात कम शुक्राणुओं के कारण नपुंसकता हो जाती है, जिसके कारण वे सेक्स क्रिया करने में असमर्थ होते हैं, और उनके लिंग में विभिन्न प्रकार की समस्याएं होती हैं। अतः पतले वीर्य के कारण पुरुषों में नपुंसकता की समस्या होती है।

पुरुषों में बाँझपन

पुरुषों में बचपन के कारण पुरुष किसी भी महिला को गर्भवती करने में असमर्थ होते हैं अर्थात पुरुषों के वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कमजोर होती है या फिर बहुत ही कम होती है। जिसके कारण उनका वीर्य बहुत अधिक पतला होता है, जब कोई महिला गर्भवती होना चाहती है, तो वह किसी पुरुष के साथ शारीरिक संबंध स्थापित करती है।

किंतु यदि किसी पुरुष का वीर्य बहुत अधिक कमजोर है, पतला है और महिला ऐसे पुरुष के साथ सेक्स क्रिया करती है, तो वह गर्भवती नहीं होती है क्योंकि ऐसे पुरूषों में बांझपन की समस्या होती है। जिसका मतलब होता है कि वह कभी भी स्वस्थ शुक्राणु महिला को नहीं दे सकते हैं। 

शुक्राणु को कैसे बढ़ाएं

शरीर में शुक्राणु संख्या बढ़ाने के लिए आवश्यक होता है कि शरीर में पर्याप्त शारीरिक शक्ति का विकास किया जाए यह शरीर में पर्याप्त शारीरिक शक्ति होती है, तो शुक्राणु निर्माण अपने आप होता रहता है।

अतः शुक्राणु की कमी शरीर में शारीरिक शक्ति की कमी के कारण ही होती है। शुक्राणु संख्या बढ़ाने के लिए शरीर में पर्याप्त पोषण तत्वों को पहुंचाना चाहिए, जिससे हमारा शरीर विकास करता है, और हमारे सहयोग की शारीरिक शक्ति बढ़ती है। शुक्राणु संख्या बढ़ाने के लिए शरीर को पर्याप्त पोषण मिलना आवश्यक होता है। शुक्राणु संख्या बढ़ाने के लिए शरीर को निम्नलिखित पोषक तत्व प्रदान करना चाहिए 

  • मसूर की दाल का प्रयोग करना चाहिए जिसमें फोलिक एसिड पाया जाता है जो शुक्राणु को बढ़ाने में सहायक होता है।
  • अश्वगंधा का प्रयोग करना चाहिए जो हमारे शरीर को शक्ति प्रदान करता है।
  • शिलाजीत का प्रयोग करना चाहिए जिससे हमारी शारीरिक शक्ति बढ़ती है।
  • जिंक युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
  • डार्क चॉकलेट का प्रयोग करना चाहिए।
  • शतावरी का प्रयोग करना चाहिए।
  • केला तथा विभिन्न प्रकार के ताजे फलों का प्रयोग करना चाहिए।
  • छिलके युक्त अनाजों का प्रयोग करना चाहिए।

शुक्राणु की कमी से बचाव

शरीर में विभिन्न प्रकार की समस्याओं के साथ-साथ शुक्राणु की कमी भी एक महत्वपूर्ण समस्या होती है शुक्राणु की कमी के कारण हमारे शरीर में विभिन्न प्रकार की समस्याएं होती हैं। जिसमें पुरुष प्रजनन क्षमता की एक समस्या  बहुत महत्वपूर्ण है शुक्राणु की कमी से बचने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं।

  • कुपोषण से बचना चाहिए।
  • वीर्य स्खलन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए।
  • जननांगों में संक्रमण से बचना चाहिए।
  • शारीरिक कमजोरी के कारणों से बचना चाहिए।
  • हार्मोंस को संतुलित रखना चाहिए।

निष्कर्ष

वीर्य की कमी हमारे शरीर में विभिन्न प्रकार की समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं जिन व्यक्तियों में वीर्य की कमी होती है, उनमें शुक्राणुओं की कमी होना निश्चित होता है। शुक्राणुओं की कमी के कारण हमारे शरीर में वीर्य पतला हो जाता है, तथा वीर्य कम हो जाता है। वीर्य की कमी के कारण हमारे शरीर में विभिन्न प्रकार की समस्याएं होती हैं, जैसे प्रजनन क्षमता कमजोर होना तथा विभिन्न प्रकार के सेक्स समस्या कमजोर होना आदि समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं आज के इस लेख में हमने शुक्राणु कमी होने के कारण तथा कमी होने से शरीर में वीर्य की कमी के लक्षण क्या है तथा शुक्राणु बढ़ाने के लिए उपयोग करने वाले खाद्य पदार्थों के बारे में वर्णित किया गया है। जिसके अध्ययन से आप शुक्राणुओं की कमी को पूरा कर सकते हैं।

FAQ

वीर्य की कमी के लक्षण क्या है?

हमारे शरीर में वीर्य की कमी के कारण विभिन्न प्रकार की बीमारियां हो जाती हैं वीर्य की कमी के कारण हमारे शरीर में सेक्स संबंधी विभिन्न प्रकार के लक्षण दिखाई देते हैं जिनके कारण हमें विभिन्न प्रकार की सेक्स समस्याएं होने लगती हैं। वीर्य की कमी के कारण प्रजनन क्षमता कमजोर हो जाती है सेक्स करने की इच्छा कम हो जाती है जिसे हम कामेच्छा का कमजोर होना कहते हैं।

निकली हुई वीर्य की भरपाई कैसे करें ?

निकली हुई वीर को शरीर अपने आप कवर करता है अर्थात जो वीर्य निकल जाता है उसको शरीर अपने आप भरपाई कर लेता लेकिन इसके लिए शारीरिक शक्ति का होना बहुत आवश्यक होता है। यदि आपकी शरीर की शारीरिक शक्ति पर्याप्त है तो वीर्य की भरपाई अपने आप हो जाती हैं।

यदि शुक्राणुओं की कमी के कारण लोग कमजोर हो जाये तो क्या करें?

शुक्राणुओं की कमी के कारण लोगों की शारीरिक शक्ति कमजोर हो जाती है तो उसके लिए आपको शारीरिक सपने में दूर करने वाले विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए, लेकिन एक बात ध्यान देने योग्य है कि शारीरिक शक्ति की कमजोरी के कारण शुक्राणुओं की कमी होती है, ना कि शुक्राणुओं की कमी के कारण शारीरिक शक्ति कमजोर होती है। शुक्राणु की कमी से होने वाली कमजोरी को दूर करने के लिए शुद्ध खाद्य पदार्थ को शक्ति देने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

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